कासगंज–06 जुलाई
उत्तर प्रदेश पावर कॉरपोरेशन के मुख्यालय शक्ति भवन से लेकर विभिन्न विद्युत वितरण कंपनियों (डिस्कॉम) के विभागीय जांच (डी०पी०) एवं अन्य मलाईदार अनुभागों में सालों से कुंडली मारकर बैठे अधिकारियों के खिलाफ अब आक्रोश सुलगने लगा है।
नियमानुसार जिस पटल पर किसी भी अधिकारी की तैनाती अधिकतम तीन से पांच वर्ष होनी चाहिए वहां डिप्टी सेक्रेटरीऔर अधिशासी अभियंता स्तर के अधिकारी अपनी धाक जमाकर लंबे समय से विराजमान हैं आरोप है कि मलाईदार पटल और रसूख के चक्कर में ये अधिकारी न सिर्फ स्थानांतरण नीति को ठेंगा दिखा रहे हैं बल्कि अपने पद का जमकर दुरुपयोग भी कर रहे हैं।
हाल ही में सामने आए एक आधिकारिक शिकायती पत्र ने इस रसूख तंत्र की पोल खोलकर रख दी है राज्य विद्युत परिषद जूनियर इंजीनियर्स संगठन उप्र द्वारा कासगंज मामले में की गई शिकायत के अनुसार एक अधिशासी अभियंता ने अपने डी०पी० अनुभाग के पुराने रसूख का खौफ दिखाते हुए मातहत कर्मचारी को धमकी दी कहा मैंने डी. पी. में रहते हुए 150 एस.डी.ओ./एस.ई. को सस्पेंड कराया है। मुझे सभी नियम-कानून पता हैं मुझे मत सिखाओ
यह घटना साफ बयां करती है कि एक ही अनुभाग या पटल पर लंबे समय तक जमे रहने से इन अधिकारियों में किस कदर तानाशाही और अहंकार घर कर जाता है चेयरमैन तक को चुनौती देने और सीधे टर्मिनेशन की धमकी देना इस बेलगाम रसूख का ही नतीजा है।
शासनादेश और बिजली विभाग के अपने नियमों के मुताबिक किसी भी पटल पर पारदर्शिता बनाए रखने और भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने के लिए 3 वर्ष (अधिकतम 5 वर्ष) में पटल परिवर्तन या स्थानांतरण अनिवार्य है लेकिन शक्ति भवन और डिस्कॉम के डी०पी० अनुभागों में कई ऐसे चेहरे हैं जो बरसों से नहीं बदले गए।
इन महत्वपूर्ण अनुभागों में रहकर ये अधिकारी पूरे महकमे में अपनी समानांतर सत्ता चलाते हैं जिससे जांचें प्रभावित होती हैं और चहेतों को बचाया व विरोधियों को प्रताड़ित किया जाता है।
विद्युत महकमे के भीतर और कर्मचारी संगठनों में अब यह मांग तेजी से जोर पकड़ रही है कि कायदे से शक्ति भवन से लेकर सभी वितरण कंपनियों के डी०पी० अनुभागों में जितने भी डी०एस०/अधिशासी अभियंता लंबे समय से जमे हैं उनका तत्काल प्रभाव से गैर-जनपद या अन्य विंग में स्थानांतरण किया जाए।
जब तक इन महत्वपूर्ण और संवेदनशील पटलों से बरसों से जमे अधिकारियों को हटाया नहीं जाएगा तब तक न तो विभाग में निष्पक्ष कार्यसंस्कृति बहाल हो पाएगी और न ही मातहत कर्मचारी भयमुक्त होकर काम कर सकेंगे अब देखना यह है कि ऊर्जा प्रबंधन इन कुर्सी कुमारों पर कब और क्या कार्यवाही करता है!
ब्यूरो रिपोर्ट
दैनिक सुदर्शन प्रवाह








