लखनऊ–13 जून
राजधानी लखनऊ के 400 केवी उपकेंद्र-जेहटा से एक बेहद चौंकाने वाला और वित्तीय अनियमितता का बड़ा मामला सामने आया है।
यहाँ एक दो नहीं बल्कि पूरे 500 MVA का विशालकाय ट्रांसफार्मर फुंकने के पीछे सीधे तौर पर अधिशासी अभियंता आलोक आनंद की घोर लापरवाही और कमीशनखोरी के खेल का पर्दाफाश हुआ है।
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार उपकेंद्र का प्रोटेक्शन सिस्टम हेल्दी यानी सुचारू रूप से काम नहीं कर रहा था।
इतनी बड़ी तकनीकी खामी को नजरअंदाज करने का नतीजा यह हुआ कि का मुख्य ट्रांसफार्मर ही फुंक गया।
इस पूरे ट्रांसफार्मर की सीधी जिम्मेदारी अधिशासी अभियंता आलोक आनंद की थी जो अपनी इस बड़ी जिम्मेदारी को निभाने में पूरी तरह नाकाम रहे।
इस पूरे मामले में सबसे बड़ा घोटाला तब सामने आया जब ट्रांसफार्मर के रिपेयरिंग का काम शुरू हुआ।
चूंकि यह ट्रांसफार्मर अभी वारंटी पीरियड में था इसलिए इसे खोलने और ठीक करने की पूरी जिम्मेदारी संबंधित निर्माता कंपनी की थी इसमें विभाग का एक भी रुपया खर्च नहीं होना चाहिए था।
ऊर्जा विभाग के राजस्व को ताक पर रखकर अधिशासी अभियंता आलोक आनंद ने अपनी चहेती छोटी-छोटी फर्मों को फायदा पहुंचाने के लिए नियम विरुद्ध टेंडर जारी कर दिया।
बड़ा सवाल क्या सिर्फ अपनी पसंदीदा फर्मों को खुश करने ट्रांसफार्मर के पार्ट्स खुलवाने और अंदरखाने मोटा कमीशन बांटने के लिए वारंटी में चल रहे ट्रांसफार्मर पर सरकारी पैसा पानी की तरह बहाया गया?
खबर है कि इस पूरे घोटाले को दबाने के लिए नीचे से लेकर ऊपर तक तगड़ी सेटिंग की गई है।
अधिशासी अभियंता ने कथित तौर पर शक्ति भवन की डिजाइन सर्किल की टीम को पूरी तरह मैनेज कर लिया है।
यही वजह है कि चेयरमैन और एम.डी. (ट्रांसमिशन) तक जमीनी हकीकत और सही रिपोर्ट पहुंच ही नहीं पा रही है|
नीचे के स्तर से लगातार झूठी और भ्रामक रिपोर्टिंग कर उच्च अधिकारियों को गुमराह किया जा रहा है|
इतने बड़े पैमाने पर राजस्व की क्षति और लापरवाही के बाद भी अधिशासी अभियंता आलोक आनंद पूरी तरह बेखौफ बने हुए हैं।
यूपीपीसीएल के चेयरमैन और शीर्ष प्रबंधन की नाक के नीचे करोड़ों का खेल हो गया लेकिन अब तक दोषी अधिकारी पर ना तो कोई गाज गिरी है और ना ही चेयरमैन का हंटर चला है।
अब देखना यह है कि इस खबर के सामने आने के बाद शासन स्तर पर क्या कार्रवाई होती है या फिर कमीशन के इस खेल के आगे सिस्टम ऐसे ही मौन रहेगा?
ब्यूरो रिपोर्ट
दैनिक सुदर्शन प्रवाह








