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नीलकंठेश्वर मंदिर पुजारी नियुक्ति विवाद में प्रशासन ने संभाली मंदिर की संपत्ति

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हैदरगढ़/बाराबंकी–02 जून

विकास खंड हैदरगढ़ क्षेत्र के हरिपालपुर गांव स्थित प्राचीन नीलकंठेश्वर महादेव मंदिर में पुजारी नियुक्ति को लेकर कई वर्षों से चल रहे विवाद के समाधान के लिए रविवार को प्रशासन ने दोनों पक्षों के साथ बैठक की। उपजिलाधिकारी राजेश विश्वकर्मा एवं पुलिस क्षेत्राधिकारी समीर सिंह की मौजूदगी में आयोजित बैठक में ग्रामीणों और संबंधित मठों के महंतों ने अपनी-अपनी बात रखी, लेकिन सहमति न बनने पर प्रशासन ने मंदिर की समस्त चल-अचल संपत्ति को अग्रिम आदेश तक तहसीलदार के अधीन कर दिया।

जानकारी के अनुसार, पूर्व महंत राजेश्वर पुरी ने अपनी समस्त चल-अचल संपत्ति नीलकंठेश्वर महादेव मंदिर के नाम कर दी थी। उनके निधन के बाद मंदिर की देखरेख और पूजा-पाठ की जिम्मेदारी महंत अजेन्द्र पुरी उर्फ अज्जू बाबा को सौंपी गई। ग्रामीणों का कहना है कि पिछले लगभग 20 वर्षों से अज्जू बाबा मंदिर की पूजा-अर्चना के साथ-साथ मंदिर की संपत्तियों का भी संरक्षण करते आ रहे हैं।

ग्रामीणों के अनुसार, बीते कुछ वर्षों से क्षेत्र के एक अन्य मठ के साधुओं द्वारा मंदिर पर दावा किए जाने के बाद विवाद गहराता चला गया। इसको लेकर कई बार दोनों पक्षों के बीच विवाद की स्थिति उत्पन्न हुई और मामला पुलिस तक भी पहुंचा, लेकिन कोई स्थायी समाधान नहीं निकल सका।

ग्रामीणों ने बताया कि मंदिर के नाम करीब 25 बीघा भूमि दर्ज है तथा परिसर में कई मूल्यवान पेड़ भी हैं। आरोप है कि कुछ लोग इन पेड़ों को बेचने की कोशिश कर रहे थे, जिसे ग्रामीणों के हस्तक्षेप से रोका गया।

रविवार को आयोजित बैठक में प्रशासन ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद फिलहाल मंदिर की समस्त चल-अचल संपत्ति को तहसीलदार के संरक्षण में रखने का निर्णय लिया। उपजिलाधिकारी राजेश विश्वकर्मा ने कहा कि दोनों पक्षों के महंतों के साथ पुनः बैठक कर मामले का समाधान निकालने का प्रयास किया जाएगा। तब तक मंदिर और उसकी संपत्तियां राजस्व विभाग के नियंत्रण में रहेंगी।

प्रशासन के इस निर्णय का क्षेत्रीय लोगों और श्रद्धालुओं ने स्वागत करते हुए इसे निष्पक्ष एवं विवाद के समाधान की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया है।

                                            ब्यूरो रिपोर्ट 

                                           शिवम् अवस्थी 

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