लखनऊ/विराम खण्ड-1,गोमतीनगर–28 मार्च
राजधानी लखनऊ को ‘स्मार्ट सिटी’ बनाने के दावे तो कागजों पर खूब चमक रहे हैं, लेकिन जमीन पर ये दावे किसी फटे हुए बिजली के खंभे की तरह बीच से चटक चुके हैं। मामला गोमतीनगर जोन के विश्वास खण्ड पावर हाउस के अंतर्गत आने वाले विराम खण्ड-1 का है, जहाँ बिजली विभाग किसी बड़े चमत्कार या शायद किसी बड़ी अनहोनी के इंतज़ार में हाथ पर हाथ धरे बैठा है।
हवा में झूलता मौत का खंभा
विराम खण्ड-1 में हाई टेंशन लाइन का एक खंभा बीच से पूरी तरह फट चुका है। हालात यह हैं कि खंभा अब अपनी मजबूती पर नहीं, बल्कि उन तारों के रहमोकरम पर टिका है जिन्हें उसे खुद सहारा देना था। यह खंभा किसी भी वक्त धराशायी हो सकता है, लेकिन बिजली विभाग के इंजीनियरों के लिए शायद यह ‘इंजीनियरिंग का अद्भुत नमूना’ है।
कुंभकर्णी नींद में ‘जिम्मेदार’
स्थानीय निवासियों का कहना है कि वे कई बार अधिकारियों को इस खतरे से आगाह कर चुके हैं। लेकिन विभाग की कार्यप्रणाली को देखकर लगता है कि अधिकारियों ने ‘जब तक गिरेगा नहीं, तब तक दिखेगा नहीं’ का संकल्प ले रखा है।
दावा: बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर और वर्टिकल व्यवस्था।
हकीकत: बीच सड़क पर खड़ा मौत का फंदा।
अधिकारियों का रुख: गहरी चुप्पी और लापरवाही की चादर।
हादसे के बाद ही जागेगा सिस्टम?
गोमतीनगर जैसे वीआईपी इलाके में अगर हाई टेंशन लाइन का खंभा गिरता है, तो जान-माल का कितना नुकसान होगा, इसका अंदाज़ा लगाना मुश्किल नहीं है। सवाल यह है कि क्या बिजली विभाग के पास मरम्मत के लिए बजट नहीं है, या फिर वे किसी मासूम की जान जाने के बाद ‘जांच कमेटी’ बैठाने की रस्म अदायगी का इंतज़ार कर रहे हैं?
व्यंग्य का तड़का: > “लगता है बिजली विभाग इस खंभे को ‘पीसा की झुकी मीनार’ बनाने की फिराक में है, ताकि पर्यटन को बढ़ावा मिले। बस फर्क इतना है कि यह मीनार गिरने पर सेल्फी नहीं, सीधे ‘परलोक’ का टिकट देगी।”
ब्यूरो रिपोर्ट
दैनिक सुदर्शन प्रवाह








