UDYAM-UP-50-0248277

वेब स्टोरी

ई-पेपर

लॉग इन करें

हैदरगढ़ में कालाबाजारी का बोलबाला एमआरपी को ठेंगा दिखा रहे दुकानदार,विभाग की चुप्पी पर सवाल

trfgcvkj.blkjhgfd

हैदरगढ़/बाराबंकी–17 फरवरी

तहसील हैदरगढ़ और आसपास के इलाकों में इन दिनों उपभोक्ताओं की जेब पर खुलेआम डाका डाला जा रहा है पान मसाला,गुटखा और सिगरेट जैसी वस्तुओं को तय अधिकतम खुदरा मूल्य (MRP) से कहीं अधिक दामों पर बेचा जा रहा है। आश्चर्य की बात यह है कि यह सब प्रशासन की नाक के नीचे हो रहा है,लेकिन जिम्मेदार विभाग ‘मौन’ साधे तमाशा देख रहा है।

कृत्रिम किल्लत का खेल

सूत्रों की मानें तो यह पूरी समस्या ‘सप्लाई की कमी’ नहीं,बल्कि ‘कृत्रिम किल्लत’ का नतीजा है। बड़े थोक विक्रेता जानबूझकर माल को डंप कर रहे हैं ताकि बाजार में सामान कम दिखे।

हकीकत यह है कि माल की जमाखोरी कर खुदरा दुकानदारों को ब्लैक में सामान बेचा जा रहा है ₹5 वाला गुटका ₹7 में और अन्य प्रीमियम ब्रांड्स पर मनमाना प्रीमियम वसूला जा रहा है।

बहाना: विरोध करने पर ग्राहकों को दो-टूक जवाब मिलता है— “पीछे से माल कम आ रहा है, लेना है तो लो वरना आगे बढ़ो।”

इन इलाकों में बुरा हाल

कालाबाजारी का यह जाल केवल हैदरगढ़ शहर तक सीमित नहीं है बल्कि असंदरा, कोठी, सिद्धौर और नई सड़क जैसे क्षेत्रों में थोक विक्रेताओं ने लूट मचा रखी है। छोटे दुकानदार भी इस मजबूरी का फायदा उठाकर ग्राहकों से अतिरिक्त वसूली कर रहे हैं।

विभागीय मिलीभगत की आशंका?

जनता के बीच अब यह सवाल उठने लगा है कि क्या यह सब विभागीय मिलीभगत से हो रहा है?

“प्रशासन की चुप्पी और कोई ठोस कार्रवाई न होना यह संकेत देता है कि कालाबाजारियों को कहीं न कहीं संरक्षण प्राप्त है। उपभोक्ता ठगा महसूस कर रहा है, लेकिन लंबी कानूनी प्रक्रिया और डर के कारण शिकायत करने से कतरा रहा है।”

चेतावनी: बढ़ सकता है आक्रोश

यदि समय रहते खाद्य एवं रसद विभाग और स्थानीय प्रशासन ने इन दुकानों और गोदामों पर छापेमारी नहीं की,तो कालाबाजारी का यह खेल और भयावह रूप ले लेगा। स्थानीय नागरिकों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि गुटखा और पान मसाला के रेट तय किए जाएं और दोषियों के खिलाफ सख्त विधिक कार्रवाई की जाए।

                                              ब्यूरो रिपोर्ट 

                                         दैनिक सुदर्शन प्रवाह 

trfgcvkj.blkjhgfd

Leave a Comment

और पढ़ें
और पढ़ें