UDYAM-UP-50-0248277

वेब स्टोरी

ई-पेपर

लॉग इन करें

अमीन सुरेश उपाध्याय की संदिग्ध परिस्थितियों में हत्या परिजनों में शोक की लहर

trfgcvkj.blkjhgfd

अम्बेडकर नगर–25 जनवरी

सदर तहसील आज़म गढ़ में तैनात रहे अमीन स्वर्गीय सुरेश उपाध्याय (उम्र लगभग 58 वर्ष) की संदिग्धावस्था में हत्या कर दी हत्या से परिवार में शोक और आक्रोश है|

मूल रूप से कुराव उपाधियां का पूरा,विकासखंड जहांगीरगंज, जनपद अंबेडकर नगर निवासी सुरेश उपाध्याय के परिजनों ने आज अपने घर पहुंचे जनपद के जाने माने वरिष्ठ समाजसेवी श्री योगेंद्र नाथ त्रिपाठी जी को पूरी घटना की क्रमवार जानकारी दी|

परिजनों ने बताया कि 17 जनवरी को सुरेश उपाध्याय वसूली कार्य के लिए क्षेत्र में निकले थे, लेकिन उसके बाद वह वापस नहीं लौटे। उसी दिन उनके सुपुत्र विकास उपाध्याय ने कोतवाली शहर आज़म गढ़ में गुमशुदगी की सूचना दी, किंतु परिवार का आरोप है कि प्रशासन की लापरवाही के कारण कोई त्वरित और गंभीर कार्रवाई नहीं की गई|

परिवार ने श्री त्रिपाठी जी को बताया कि 20 जनवरी 2026 को स्थानीय लोगों ने नरौली आज़म गढ़ रोड पर बसपा कार्यालय से लगभग दो सौ मीटर की दूरी पर, एक सरसों के खेत में शव पड़े होने की सूचना पुलिस को दी। मौके पर पहुंचे परिजनों ने शव की पहचान अपने स्वजन के रूप में की, जिसके बाद कोतवाली में हत्या का मुकदमा दर्ज किया गया।

परिजनों ने यह भी आरोप लगाया कि क्षेत्र के एक दबंग व्यक्ति पर करीब 30 लाख रुपये का सरकारी बकाया था, जिसकी आरसी पहले ही कट चुकी थी। तहसील प्रशासन द्वारा लगातार दबाव बनाए जाने के कारण अमीन उपाध्याय जी को उसी व्यक्ति के यहां बार-बार वसूली के लिए भेजा जा रहा था। परिवार का स्पष्ट कहना है कि यही वसूली उनकी हत्या का कारण बनी और इसी बिंदु पर गहन जांच की आवश्यकता है|

परिवार की बातों को गंभीरता से सुनते हुए श्री योगेंद्र नाथ त्रिपाठी जी भावुक हो उठे। उन्होंने कहा कि एक ईमानदार कर्मचारी को अपने कर्तव्य पालन की कीमत अपनी जान देकर चुकानी पड़ी, यह अत्यंत पीड़ादायक और दुर्भाग्यपूर्ण है|

परिवार से मिली जानकारी के आधार पर श्री त्रिपाठी जी ने प्रशासन से मांग की–प्रारंभिक स्तर पर हुई सभी प्रशासनिक लापरवाहियों की निष्पक्ष जांच कराई जाए|

जिन व्यक्तियों पर परिवार ने संदेह व्यक्त किया है, उनकी तत्काल जांच हो|

इस जघन्य हत्या में शीघ्र गिरफ्तारी सुनिश्चित की जाए और मुकदमे का त्वरित निस्तारण किया जाए|

पीड़ित परिवार को पांच करोड़ रुपये का मुआवजा दिया जाए|

परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी प्रदान की जाए, ताकि भविष्य सुरक्षित हो सके|

उन्होंने भरोसा दिलाया कि वह पीड़ित परिवार की लड़ाई में उनके साथ खड़े रहेंगे और जब तक उन्हें न्याय नहीं मिलता, तब तक यह आवाज़ बुलंद करते रहेंगे|

इस हृदय विदारक घटना ने न केवल एक परिवार को तोड़ दिया है, बल्कि प्रशासनिक व्यवस्था पर भी गंभीर प्रश्न खड़े कर दिए हैं। क्षेत्र में शोक के साथ-साथ न्याय की मांग तेज़ होती जा रही है|

                                   दैनिक सुदर्शन प्रवाह 

                                              संवाददाता 

trfgcvkj.blkjhgfd

Leave a Comment

और पढ़ें
और पढ़ें