रायबरेली/लालगंज–28 मई
उत्तर प्रदेश में भ्रष्टाचार के खिलाफ ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति के दावों के बीच ग्राम सभा नुनेरा का एक सनसनीखेज मामला सामने आया है।
यहाँ विकास कार्यों के नाम पर सरकारी धन की बंदरबांट और उसका विरोध करने पर शिकायतकर्ता के परिवार पर जानलेवा हमले का आरोप लगा है।
विडंबना यह है कि घटना के 5 साल बीत जाने के बाद भी दोषी खुलेआम घूम रहे हैं और पुलिसिया कार्यवाही सिर्फ कागजों तक सीमित सिमट कर रह गई है।
आरोप है कि तत्कालीन ग्राम प्रधान सुनीता और पूर्व ग्राम विकास अधिकारी सैफ अली जायसवाल ने आपसी सांठगांठ कर ग्राम सभा नुनेरा में फर्जी विकास कार्य दिखाकर 50 लाख रुपये से अधिक की सरकारी धनराशि का गबन कर लिया।
जब इस वित्तीय अनियमितता की शिकायत की गई तो भ्रष्टाचार की पोल खुलने के डर से शिकायतकर्ता की आवाज को दबाने के लिए खूनी संघर्ष का सहारा लिया गया।
शिकायतकर्ता का आरोप है कि 14 जून 2020 को पूर्व प्रधान पति बबलू रणधीर के नेतृत्व में दर्जनों लोगों ने पुलिस बल की मौजूदगी में शिकायतकर्ता और उनके परिवार पर जानलेवा हमला बोल दिया।
इस हमले में मुख्य रूप से शामिल नाम जयश्री पत्नी राम सजीवन,रोशन पुत्र राम सजीवन,शांति पत्नी रमेश,रमेश पुत्र चौधरी,रिंकू व रेंशू पुत्रगण रणधीर रविंद्र कुमार पुत्र शिवराम,प्रांजल पुत्र रविंद्र कुमार,अंकुल पुत्र बाबूलाल विटना पत्नी कन्हैया लाल।
इस हमले में उमाशंकर, गुड्डू (पुत्रगण राम शंकर),अंजनी पुत्र रामराज और शिल्पी पत्नी उमाशंकर गंभीर रूप से घायल हुए थे।
हैरानी की बात यह है कि इस गंभीर हमले और लाखों के गबन के साक्ष्य होने के बावजूद स्थानीय थाने द्वारा अब तक कोई ठोस कार्यवाही नहीं की गई है।
पीड़ित परिवार का कहना है कि पिछले 5 सालों से हम थाने और अधिकारियों के चक्कर काट रहे हैं।
जांच के नाम पर सिर्फ फाइलें इधर से उधर दौड़ रही हैं लेकिन धरातल पर दोषियों के खिलाफ कोई गिरफ्तारी या प्रभावी एक्शन नहीं हुआ।
सवाल यह कि आखिर किसके संरक्षण में पूर्व प्रधान और ग्राम विकास अधिकारी पर कार्यवाही रुकी हुई है?
50 लाख के गबन की रिकवरी अब तक क्यों नहीं की गई?
पुलिस की मौजूदगी में हमला होने के बावजूद दोषियों को क्लीन चिट या ढील कैसे मिल रही है?
यह मामला प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गहरा प्रश्नचिह्न लगाता है यदि समय रहते उच्चाधिकारियों ने इस पर संज्ञान नहीं लिया तो न केवल सरकारी धन की लूट जारी रहेगी बल्कि न्याय की उम्मीद लगाए बैठे पीड़ितों का सिस्टम से भरोसा उठ जाएगा।
प्रशासन को चाहिए कि इस मामले की फाइलें दोबारा खोलकर गबन की रिकवरी करे और जानलेवा हमले के आरोपियों को जेल की सलाखों के पीछे भेजें|
ब्यूरो रिपोर्ट
दैनिक सुदर्शन प्रवाह








