लखनऊ–19 मई
पावर सेक्टर से एक ऐसी खबर सामने आई है जिसने विभाग के भीतर मचे हड़कंप को चौराहे पर ला खड़ा किया है।
प्रदेश में बिजली की मांग और आपूर्ति के बीच चल रहे अंधेरगर्द को अब और दबाया नहीं जा सकेगा।
मुख्य अभियंता (SLDC) द्वारा जारी एक पत्र ने विभाग के उन कमाऊ पूत अधिकारियों की पोल खोल दी है जो उच्चा धिकारियों की आंखों में धूल झोंककर बिजली कटौती की जानकारी छिपा रहे हैं।
एस०एल०डी०सी० को भेजी जाने वाली बिजली कटौती की रिपोर्ट में बड़े पैमाने पर हेरफेर किया जा रहा है।
इतनी बड़ी लापरवाही और डेटा की चोरी पर शक्ति भवन के शीर्ष अधिकारियों की खामोशी कई गंभीर सवाल खड़े कर रही है।
क्या जांच कमेटी मीटर की रिले रीडिंग चेक करने का साहस दिखाएगी? या फिर रसूखदार अधिकारियों को बचाने के लिए मामले को ठंडे बस्ते में डाल दिया जाएगा।
ऊर्जा विभाग के गलियारों में यह चर्चा आम है कि कुछ अधिकारी अपनी साख बचाने और ऊपरी दबाव से बचने के लिए कागजों पर निर्बाध बिजली आपूर्ति दिखा रहे हैं जबकि हकीकत में जनता कटौती से त्रस्त है।
बड़ा सवाल क्या यह महज़ एक लापरवाही है या इसके पीछे कोई बड़ा वित्तीय खेल है?
अगर कटौती की सही जानकारी छुपाई जा रही है, तो इसका सीधा मतलब है कि सिस्टम की मॉनिटरिंग के साथ खिलवाड़ हो रहा है।
तकनीकी विशेषज्ञों का मानना है कि यदि ईमानदारी से जांच हुई तो सब स्टेशनों पर लगे फीडर मीटर और उनकी रिले पूरी सच्चाई उगल देंगी।
रिले की रिकॉर्डिंग से यह साफ हो जाएगा कि किस समय बिजली काटी गई और कितनी देर तक फीडर बंद रहा।
इस खुलासे ने ऊर्जा विभाग की कार्यप्रणाली को कटघरे में खड़ा कर दिया है।
एक तरफ सरकार 24 घंटे बिजली देने का दावा कर रही है वहीं विभाग के भीतर ही सूचनाओं का दम घोंटा जा रहा है।
अब देखना यह है कि जांच की आंच असली गुनहगारों तक पहुँचती है या हर बार की तरह छोटे कर्मचारियों पर गाज गिराकर मामला रफा-दफा कर दिया जाएगा।
ब्यूरो रिपोर्ट
दैनिक सुदर्शन प्रवाह








