हैदरगढ़/बाराबंकी–18 मई
शिक्षा जगत में विभागीय मिलीभगत के चलते किस कदर भ्रष्टाचार व्याप्त है उसका जीता जागता उदाहरण आपको विकास खंड हैदरगढ़ में तमाम जगहों पर देखने को मिल जायेगा। शिक्षकों के स्कूल न पहुंचने और उनके घर बैठे हाजिरी लगाने की शिकायत पर 6 मई को कंपोजिट विद्यालय अहिरगांव के रियलिटी चेक में बड़े स्तर पर भ्रष्टाचार निकल कर सामने आया था । जिसकी खबर राष्ट्रीय दैनिक अखबार जनसंदेश टाइम्स ने 8 मई को लखनऊ सिटी एडिशन में प्रमुखत: से छापी थी। आपको बता दें कि कंपोजिट विद्यालय अहिरगांव में 7 शिक्षकों की तैनाती है लेकिन रियलिटी चेक में मौके पर सिर्फ 3 अध्यापक ही मौजूद मिले। ऐसे में शिक्षा व्यवस्था कैसे दुरूस्त होगी ये बड़े सवाल खड़े करता है। सरकार द्वारा ग्रामीण बच्चों को सरकारी स्कूल में भेजने के लिये करोड़ों रूपये सिर्फ विज्ञापन में खर्च कर देती है लेकिन जब ऐसे मामले सामने आयेंगे तो बच्चों को उच्च शिक्षा देने की बात बेइमानी साबित होगी।
कंपोजिट विद्यालय अहिरगांव में 7 शिक्षकों में मौके पर प्रधानाचार्य शिवपूजन शर्मा, सहायक अध्यापक चंद्र प्रकाश सिंह व एक अन्य अध्यापक मौजूद मिले थे लेकिन विद्यालय में अनुपस्थित रहने वाले अध्यापकों में सहायक अध्यापक हरिमोहन मिश्रा, व मो. सलमान, अनुदेशक रवि प्रकाश तिवारी व सुमन मौर्या शामिल हैं। सूत्रों की मानें तो अधिकांश शिक्षक अधिकतर विद्यालय नहीं आते हैं या फिर हाजिरी लगाकर नौ दो ग्यारह हो जाते हैं। आपको बता दें कि पिछले दिनों हुये विद्यालय के रियलिटी चेक में शिक्षकों के गायब होने और उनकी हाजिरी रजिस्टर पर चढ़ी होने के मामले में प्रधानाचार्य शिवपूजन शर्मा का बयान बेहद मायने रखता है जिसका वीडियो शोसल मीडिया पर तेजी से वायरल है जिसमें उन्होंने सहायक अध्यापक हरिमोहन मिश्रा को लेकर बताया था कि वो 6 मई को विद्यालय नहीं आये थे , उक्त वीडियो खंड शिक्षा अधिकारी को भी भेजा गया था जो महोदया के पास भी मौजूद है, मामले को लेकर सहायक अध्यापक हरिमोहन मिश्रा ने रिश्तेदार की शादी में शिरकत करने के लिये प्रयागराज में होने की बात कही थी, उक्त मामले को लेकर खबर प्रकाशित होने के बाद खंड शिक्षा अधिकारी आराधना अवस्थी एक्शन में नजर आई थी और विद्यालय का औचक निरीक्षण कर शिक्षकों को डांट फंटकार भी लगाई थी लेकिन 10 दिन बीत जाने के बाद भी जब मामले को लेकर कोई एक्शन नहीं हुआ और खंड शिक्षा अधिकारी से कार्यवाही को लेकर सवाल पूछा गया तो उन्होंने रजिस्टर में हाजिरी दर्ज होने और पर्याप्त सबूत न होने की बात कहकर मामले को टाल दिया था। जब प्रधानाचार्य द्वारा शिक्षक के अनुपस्थित होने का प्रमाण दिया गया तो खंड शिक्षा अधिकारी महोदय मामले में गोलमोल जवाब देती नजर आयी जिसमें उन्होंने कहा था कि उक्त मामले को लेकर आख्या बेसिक शिक्षा अधिकारी को भेजी जा चुकी है और कार्यवाही के लिये खंड शिक्षा अधिकारी अधिकृत नहीं हैं। सूत्रों की मानें तो खंड शिक्षा अधिकारी कार्यालय तक विद्यालय से गायब रहने वाले शिक्षकों द्वारा आपस में चंदा लगाकर मोटी रकम पहुंचाई जिसके बाद खंड शिक्षा अधिकारी कार्यालय का माहौल ही बदल गया। इसके बाद भ्रष्टाचार यही नहीं खत्म हुआ बल्कि अखबार में प्रकाशित खबर का खंडन भी कराया गया। वहीं गांव के जिम्मेदार लोगों और समाजसेवियों का कहना है कि विद्यालय में शिक्षक अधिकतर गायब रहते हैं और रजिस्टर पर हाजिरी लगाने का खेल वर्षों से चल रहा है। सूत्रों की मानें तो विद्यालय में कुछ हिटलरशाह भी मौजूद हैं जिनके रसूख व तीमारदारी के चलते लोग शिकायत करने से डरते हैं। विद्यालय के कुछ बच्चों ने आफ कैमरा बताया कि विद्यालय में अधिकतर शिक्षकों के गायब रहने की वजह से उनकी पढ़ाई नहीं हो पाती है, ऐसे में नौनिहालों का भविष्य अधर में लटका नजर आ रहा है और कई तरह के गंभीर सवाल खड़े करता है। विद्यालय से गायब रहने वाले शिक्षक सरकार के सर्व शिक्षा अभियान पर पलीता लगाने में कोई गुरेज नहीं कर रहे हैं। अब देखना है कि उक्त मामले को लेकर जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी द्वारा क्या कठोर कार्यवाही की जायेगी या फिर नोटों की गड्डी एक बार फिर विभागीय भ्रष्टाचार उजागर करने में आड़े आयेगी।
ब्यूरो चीफ़
शिवम् अवस्थी








