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नरौली में 12वें संत सम्मेलन में महान संतों ने बहायी भक्ति की रसधार 

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हैदरगढ़/बाराबंकी–25 मार्च

विकास हैदरगढ़ की ग्राम पंचायत नरौली में 12वें रामचरितमानस में संतों ने भक्ति की अमृत वर्षा की।

जीव परमात्मा का अंश है। वह अपने अंशी परमात्मा से अलग हो जाने के कारण संसार में भटकता रहता है। जब तक उसे परमात्मा का दर्शन नहीं हो जाता तब तक संसार के जन्म-मृत्यु रूप भवजाल से छुटकारा नहीं मिल सकता है। ये विचार सूर्या सेवा संस्थान द्वारा आयोजित पं. बिन्द्राप्रसाद मिश्र की 10वीं पुण्य स्मृति में आयोजित मानस सम्मेलन के 12वाँ वार्षिकोत्सव के अवसर पर कुरुक्षेत्र बाराबंकी से पधारे मानस के गम्भीर चित्रक एवं समीक्षक पं. रामकिंकर मिश्र ने व्यक्त किये। पं. मिश्र ने कहा कि जीव अपने शुद्ध निर्मल स्वरूप को भूलकर संसार की बाहरी चमक-दमक और नाशवान भोग विलास में फँस गया है। संसार का यही आकर्षण माया है। जिस प्रकार बादलों से गिरने वाला वर्षा का जल मूलतः पूर्ण स्वच्छ एवं निर्मल होता है किन्तु पृथ्वी पर गिरते ही धूल कणों से मिलकर मलिन हो जाता है उसी प्रकार शुद्ध बुद्ध जीव संसार की माया के कारण अपने वास्तविक रूप को भूल जाता है, भूमि परत भा दावर पानी । तिमि जीवहिं माया लपटानी। प्रेमदास कुटी हैदरगढ़ के महन्त लालता दास जी ने बताया कि शरीर एक रथ के समान है। इस शरीर रूपी रथ में इन्द्रियाँ घोड़े हैं। जो विषय रुपी चरागाह की ओर भागते हैं। अतः उन्हें रोकने के लिए मन रूपी लगाम लगाने की जरूरत है। इस रथ का सारथी या चालक बुद्धि है। अतः बुद्धि से विचार कर इंद्रियों को रूप रस, गन्ध आदि विषयों की ओर जाने से रोककर कल्याणकारी भगवत मार्ग की ओर लगाना चाहिए।

रायबरेली से पधारे डॉ. कृष्णकुमार मिश्र मानस मनीषी ने आधुनिक समाज में हो रहे पारिवारिक विघटन को रोकने की दृष्टि से मानस में वर्णित भ्रात प्रेम अपनाने पर बल दिया उन्होने बताया कि भरत और लक्ष्मण का चरित्र इसके लिए अनुकरणीय है। एक ओर भरत जी बड़े भाई राम के सम्मान में राज्य पाकर भी उसका परित्याग कर देते हैं और उन्हें मनाने वन चले जाते हैं। वहीं दूसरी ओर लक्ष्मण जी राम की सेवा करने के लिए अपने सुख की चिन्ता छोड़कर उनके साथ हठ करके बन चले चले जाते जाते हैं। माता सुमित्रा भी लक्ष्मण को विदा करते उपदेश देती है कि राम को पिता और सीता को माता मानकर उनकी सदैव सेवा करना, तात तुम्हारि मातु बैदेही । पिता रामु सब भाँति सनेही ॥ 

गोसाईगंज- लखनऊ से समागत मानस व्यास पं स्वामीदीन शुक्ल रामायनी जी, सतसंग शब्द की व्याख्या करते हुए बताया कि सतसंग कोई धार्मिक या आध्यात्मिक जीवन का ही अंग नहीं है अपितु जीवन का प्रत्येक क्षण अच्छे सदाचारी लोगों के साथ अथवा उत्तम साहित्य जैसे गीता, रामायण या सन्तों महापुरु‌षों की जीवनी पढ़ने में बिताना चाहिए। सतसंग से जीवन का परिष्कार होता है और तभी लौकिक-पारलौकिक कल्याण होता है, सतसंगति मुद मंगल मूला ।सोई फल सिद्धि सब साधन फूला ॥

अयोध्या के पं० दिनेश मिश्र दीनबन्धु महाराज ने कहा कि संसार में साधुता सुन्दर आचरण से आती है। वही सच्चा साधु है जो जीवन में सत्य, दया, परोपकार आदि मानवीय गुणों का कठिन से कठिन से कठिन परिस्थितियों में भी परित्याग नहीं करता, जो सहि दुख पर छिद्र दुरावा । वंदनीय जेहि जग जस गावा ॥ अवधी सम्राट पं. हरिनारायण तिवारी ने कहा कि यह सम्पूर्ण जगत भगवान का शरीर है। अतः जगत से प्रेम और सबकी सेवा ही जगदीश्वर की सेवा और प्रेम है। कवि एवं वक्ता पं. यदुनाथ द्विवेदी राष्ट्र‌प्रेमी ने कहा कि निष्कामता ही सर्वोत्तम भक्ति है। इसे प्रेमा भक्ति कहा जाता है जिसका पूरे मानस में भरत जी ने पालन किया है। कार्यक्रम का संचालन करते हुए वीररस के प्रतिष्ठित कवि एवं लेखक रामेश्वर प्रसाद द्विवेदी प्रलयंकर ने कहा कि भारतवर्ष सदैव से विश्वगुरु रहा है क्योंकि यहाँ के ऋषियों का सबसे बड़ा कार्य ईश्वर की खोज है। जंगलों में रहकर कठोर साधना के द्वारा ऋषियों ने सर्वव्यापक ब्रम्ह का साक्षात्कार किया और जीवमात्र से प्रेम करने का विश्व को सन्देश दिया।

कार्यक्रम के संयोजक एवं सूर्या सेवा संस्थान के प्रबंधक नन्द कुमार मिश्र ने अपने सम्बोधन में कहा कि मानस अत्यन्त बोधगम्य एवं सामाजिक समरसता प्रधान ग्रन्थ है। अतः मानस की शिक्षाओं को जन जन तक पहुँचानों के लिए मानस सम्मेलनों का आयोजन स‌माज सेवा प्रमुख अंग है।

कार्यक्रम के सहसंयोजक भानुकुमार मिश्र ने समागत अतिथियों का स्वागत करते हुए कहा कि भारतीय संस्कृति के अनुसार अतिथि को देवतुल्य मानकर उसके स्वागत की उदक्त परम्परा है जो भारत की विनयशीलता की परिचायक है।

महंत मधुसूदन दास गौरैया धाम ने आये हुए सन्तों, विद्वानों एवं प्रबुद्ध श्रोताओं तथा भक्तों के प्रति कृतज्ञता पूर्ण आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि समाज में अध्यात्म चेतना जागृत करने में भारतीय संतो का महत्वपूर्ण योगदान रहा है। अतः उनके प्रति विनम्र आभार हम सभी का परम कर्तव्य है।

प्रवचन पण्डाल में दूर दूर से आये श्रद्धालुओं ने तन्मयता से कथामृत का पान किया । सभा में राजकुमार शर्मा, ब्लॉक प्रमुख प्रतिनिधि रामदेव सिंह, महादेव पाठक, अलगू सिंह, अनिल तिवारी, उपेंद्र मिश्रा,पवन मिश्रा,राजीव त्रिपाठी,डॉ शिवकांत,समाजसेवी दिनेश मिश्रा, संतोष तिवारी , राम जानकी महाविद्यालय के प्रबंधक महेश शुक्ला , बब्लू शुक्ला,राज कुमार पांडे उमेश शुक्ला,तेज तिवारीआदि उपस्थित रहे|

                                          ब्यूरो रिपोर्ट 

                                    दैनिक सुदर्शन प्रवाह 

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