लखनऊ–31 जनवरी
यूजीसी एक्ट को लेकर देशभर में चल रही बहस के बीच न्यायालय द्वारा लगाई गई रोक का छात्र समुदाय और सर्व समाज ने स्वागत किया है
इस संबंध में भाजपा युवा नेता अमन त्रिपाठी ने अपनी स्पष्ट प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कि उनका विरोध कोर्ट के स्टे से नहीं, बल्कि यूजीसी एक्ट के उस स्वरूप से है जो समाज और छात्रों को विभाजित करने की आशंका पैदा करता है
युवा नेता अमन त्रिपाठी ने कहा
“हम न्यायालय द्वारा लगाए गए स्टे का स्वागत करते हैं। हमारा विरोध स्टे का नहीं, बल्कि इस यूजीसी एक्ट का है हम सरकार से मांग करते हैं कि इस एक्ट को लागू न होने दिया जाए उन्होंने आगे कहा कि शिक्षा समानता और एकता का माध्यम है न कि भेदभाव का।
अमन त्रिपाठी ने अपने बयान में कहा कि विद्यार्थी की कोई जाति नहीं होती,उसकी पहचान केवल विद्यार्थी होती है छात्र एक साथ बैठकर पढ़ते हैं एक साथ खाते हैं और एक साथ रहते हैं यदि इस तरह के एक्ट लागू किए गए तो शैक्षणिक संस्थानों में भेदभाव और आपसी दूरी बढ़ेगी।
अमन त्रिपाठी ने आशंका जताई कि इस एक्ट के लागू होने से छात्रों के बीच जातिगत भावना उत्पन्न हो सकती है जो देश के भविष्य और सामाजिक समरसता के लिए घातक सिद्ध होगी उन्होंने सरकार से अपील की कि वह छात्रों और सर्व समाज की भावनाओं को ध्यान में रखते हुए इस एक्ट पर पुनर्विचार करे।
उन्होंने कहा कि यह विरोध केवल व्यक्तिगत नहीं बल्कि सर्व समाज और छात्र समुदाय की सामूहिक आवाज़ है।
दैनिक सुदर्शन प्रवाह
जिला संवाददाता
राजन कश्यप








