प्रयागराज–31 जनवरी
जस्टिस अरुण कुमार देशवाल की बेंच ने कहा कि पुलिस अधिकारी केवल तारीफ समय से पहले प्रमोशन और सोशल मीडिया पर वाहवाही पाने के लिए अनावश्यक रूप से गोली चला रहे हैं जो कानून के खिलाफ है।
हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि आरोपी को सज़ा देने का अधिकार सिर्फ न्यायपालिका के पास है पुलिस के पास नहीं भारत एक लोकतांत्रिक देश है जहां कानून संविधान के अनुसार चलता है न कि किसी अधिकारी की व्यक्तिगत सोच के आधार पर|
कोर्ट ने कहा कि कई मामलों में पुलिस जानबूझकर आरोपी के घुटनों से नीचे पैर में गोली मारती है ताकि मामला ‘हाफ एनकाउंटर’ कहलाए और बहादुरी का श्रेय लिया जा सके कानून की नजर में यह तरीका पूरी तरह अस्वीकार्य है|
हाईकोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइंस के पालन को अनिवार्य बताते हुए 6 बिंदुओं पर निर्देश जारी किए हैं कोर्ट ने चेतावनी दी कि अगर इन गाइडलाइंस का पालन नहीं हुआ तो जिले के पुलिस अधीक्षक, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक और पुलिस कमिश्नर को व्यक्तिगत रूप से कोर्ट की अवमानना का दोषी माना जाएगा। यह आदेश जमानत याचिका की सुनवाई के दौरान दिया गया|
दैनिक सुदर्शन प्रवाह
ब्यूरो चीफ़
राजीव श्रीवास्तव








