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बिजली कंपनियों में मैनपावर का गंभीर संकट तत्काल भर्ती आवश्यक

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लखनऊ–18 जनवरी

उत्तर प्रदेश में उपभोक्ताओं की संख्या के सापेक्ष बिजली कंपनियों में मैनपावर का गंभीर संकट, 
उत्तर प्रदेश में बिजली उपभोक्ताओं की संख्या निरंतर बढ़ती जा रही है। वर्तमान में प्रदेश में विद्युत उपभोक्ताओं की संख्या लगभग तीन करोड़ 62 लाख के करीब पहुँच चुकी है। इसके सापेक्ष यदि उपभोक्ता सेवा, शिकायत निस्तारण, तकनीकी अनुरक्षण एवं विद्युत आपूर्ति व्यवस्था की बात की जाए तो बिजली कंपनियों में मैनपावर की स्थिति अत्यंत चिंताजनक बनी हुई है।
उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष एवं राज्य सलाहकार समिति के सदस्य अवधेश कुमार वर्मा ने कहा कि प्रदेश की सभी वितरण कंपनियों में सहायक अभियंता, अवर अभियंता (जूनियर इंजीनियर), टीजी-2 एवं अन्य तकनीकी व गैर-तकनीकी पदों पर भर्ती व्यवस्था लगभग पूरी तरह ठप पड़ी है। भर्ती की बात तो दूर, वर्तमान में बड़े पैमाने पर संविदा कार्मिकों, चतुर्थ श्रेणी कार्मिकों एवं अन्य सहयोगी कर्मचारियों की संख्या में भी लगातार कमी हो रही है, जो उपभोक्ता सेवा के दृष्टिकोण से अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है।
उन्होंने कहा कि बिना पर्याप्त मैनपावर के उपभोक्ता सेवा में सुधार संभव नहीं है। उपभोक्ता सेवा के लिए राष्ट्रीय स्तर पर निर्धारित मानक (नेशनल बेंचमार्क) मौजूद हैं, लेकिन उत्तर प्रदेश की बिजली कंपनियों में उन मानकों की पूर्णतः अनदेखी की जा रही है। वर्तमान स्थिति यह दर्शाती है कि पावर कॉरपोरेशन यह मानकर चल रहा है कि उपभोक्ता सेवा बिना मैनपावर के ही संभव हो जाएगी, जो कि व्यवहारिक और यथार्थ से परे है।
अवधेश कुमार वर्मा ने यह भी कहा कि विद्युत उपभोक्ता मुआवजा कानून-2019 आज तक धरातल पर लागू नहीं हो पाया है, जिसका एक प्रमुख कारण बिजली कंपनियों में भारी मैनपावर की कमी है। शिकायतों के निस्तारण के लिए स्थापित 1912 हेल्पलाइन व्यवस्था पूरी तरह विफल सिद्ध हो रही है, क्योंकि फील्ड स्तर पर शिकायतों को सुलझाने के लिए न तो पर्याप्त इंजीनियर हैं और न ही तकनीकी कर्मचारी।
उन्होंने बताया कि वर्तमान में पूरे उत्तर प्रदेश में नियमित विद्युत कार्मिकों की संख्या मात्र लगभग 28,000 के आसपास रह गई है, जबकि कभी संविदा कार्मिकों की संख्या 8,500 से अधिक हुआ करती थी, जो अब काफी घट चुकी है। इतने विशाल प्रदेश और करोड़ों उपभोक्ताओं के लिए यह संख्या अत्यंत अपर्याप्त है।
परिषद का स्पष्ट मत है कि यदि शीघ्र ही भर्ती प्रक्रिया प्रारंभ नहीं की गई, तो आगामी ग्रीष्मकाल में बिजली आपूर्ति, फाल्ट निस्तारण, बिलिंग, मीटरिंग एवं उपभोक्ता शिकायतों पर गंभीर और नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी बिजली कंपनियों एवं पावर कॉरपोरेशन की होगी।
राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद उत्तर प्रदेश सरकार से यह पुरजोर मांग करती है कि:

उपभोक्ताओं की संख्या के अनुपात मेंसभी बिजली वितरण कंपनियों में सहायक अभियंता, जूनियर इंजीनियर, टीजी-2, तकनीकी एवं सहायक पदों पर तत्काल और बड़े पैमाने पर भर्ती प्रक्रिया शुरू की जाए, ताकि उपभोक्ता सेवा में वास्तविक सुधार हो सके और बिजली व्यवस्था को सुचारु रखा जा सके।
यदि समय रहते इस दिशा में ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो इसका खामियाजा सीधे प्रदेश के करोड़ों विद्युत उपभोक्ताओं को भुगतना पड़ेगा

                                     दैनिक सुदर्शन प्रवाह 

                                                  ब्यूरो चीफ़ 

                                              राजीव श्रीवास्तव

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