लखनऊ–19 जुलाई
उत्तर प्रदेश के ऊर्जा विभाग में भ्रष्टाचार मनमानी और तबादला उद्योग के कारनामों का एक ऐसा सनसनीखेज मामला सामने आया है, जिसे सुनकर किसी भी ईमानदार कर्मचारी के पैरों के तले से जमीन खिसक जाए।
मामला यूपी पावर कॉरपोरेशन के विद्युत पारेषण खंड-प्रथम लखनऊ का है जहां बीमारी और पारिवारिक परिस्थितियों से जूझ रहे एक अवर अभियंता को अपने हक का काम मांगना इस कदर भारी पड़ गया कि उसे अफसरों की आपसी सांठ-गांठ और रंजिश का शिकार होना पड़ा।
यह पूरी कहानी बिजली विभाग के भीतर बैठे कुछ कमाऊ पूत अफसरों की तानाशाही वित्तीय अनियमितताओं और ईमानदार कर्मियों के मानसिक उत्पीड़न की पोल खोलती है।
पीड़ित अवर अभियंता अपनी बीमारी और घरेलू मजबूरियों के कारण 132 केवी उपकेंद्र सिधौली से ट्रांसफर करवाकर 132 केवी उपकेंद्र-जेहटा लखनऊ आए थे रिक्त सीट होने पर अधीक्षण अभियंता ने उनकी तैनाती की थी।
सूत्रों के मुताबिक 22 जून 2025 को जब अवर अभियंता अपनी ज्वाइनिंग देने अधिशासी अभियंता विद्युत पारेषण खंड-प्रथम आलोक आनंद के सामने पहुंचे तो अधिशासी अभियंता भड़क गए उन्होंने तुरंत फोन पर ही अधीक्षण अभियंता से बहस शुरू कर दी कि यहां जेई की क्या जरूरत है? इन्हें मोहान भेज देते हैं जब अधीक्षण अभियंता ने कड़ा रुख अपनाते हुए पूछा कि एसई मैं हूं या तुम? तब जाकर फोन कटा।
इसके बाद अधिशासी अभियंता आलोक आनंद ने अवर अभियंता को यह कहकर अपमानित किया कि तुम जेई लोग बहुत नाजुक हो पहले काम सीखो फिर चार्ज देंगे अवर अभियंता जो पहले भी डेढ़-दो साल सफलतापूर्वक बिजलीघर का चार्ज संभाल चुके थे उन्हें साल भर से ज्यादा समय बीतने के बाद भी उपकेंद्र का चार्ज नहीं दिया गया।
हद तो तब हो गई जब उनसे मौखिक तौर पर सारे काम कराए गए लेकिन विभागीय वाट्सअप ग्रुपों में उनके काम की तस्वीरों को नजरअंदाज किया गया और उन्हें ग्रुप से भी बाहर रखा गया।
बड़ा सवाल बिना चार्ज मिले कोई भी कर्मचारी इंटरप्राइज रिसोर्स प्लानिंग सिस्टम पर प्रतिदिन का कार्य कैसे सीख सकता है?
चार्ज न देना किसी कर्मचारी के मुंह से निवाला छीनने जैसा है इस उत्पीड़न की शिकायत अधीक्षण अभियंता और मुख्य अभियंता से भी की गई लेकिन आरोप है कि दावतों और आपसी सांठ-गांठ के खेल में बड़े अफसर भी इस अधिशासी अभियंता के आगे लाचार दिखे।
बड़े-बड़े ब्लैकआउट पर भी कार्रवाई नहीं अवर अभियंता का उत्पीड़न करने वाले अधिशासी अभियंता आलोक आनंद के कार्यकाल में लखनऊ और आसपास के क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर लापरवाही के मामले सामने आए हैं|
नादरगंज 220 केवी उपकेंद्र 5 से 6 घंटे तक पूरी तरह ब्लैकआउट रहा 220 केवी उपकेंद्र हरदोई रोड और टी.आर.टी. बिजलीघर पूरी तरह ठप हुए जेहटा उपकेंद्र में 500 एमवीए का भारी-भरकम ट्रांसफार्मर फुंक गया जिससे करोड़ों का नुकसान हुआ।
हैरानी की बात यह है कि इसी डिवीजन में पूर्व में तैनात रहे संजय पासवान को लाइन ट्रिपिंग के मामले में दो बार निलंबित कर दिया गया था लेकिन वर्तमान अधिशासी अभियंता के 100 खून माफ हैं|
चर्चा है कि कमाऊ पूत होने के कारण वे पिछले 10 वर्षों से अधिक समय से लखनऊ में ही जमे हुए हैं 2012 बैच के सहायक अभियंता शक्ति भवन में उनके खिलाफ चल रहीसी.पी.एफ.और चिकित्सा प्रतिपूर्ति घोटाले की जांचों को भी ठंडे बस्ते में दबा दिया गया है।
ऊपर वालों के आशीर्वाद से वापस लखनऊ लौटे जब अवर अभियंता ने अपने अधिकारों की बात की तो अधिशासी अभियंता ने रंजिश के तहत अपने एक पुराने साथी (जो पूर्व में उनके साथ सरोजनी नगर में तैनात थे और वर्तमान में प्रयागराज में SE-T&C हैं तथा जिन्हें मुख्य अभियंता पारेषण मध्य लखनऊ का अतिरिक्त चार्ज मिला हुआ है) से सेटिंग बिठाई बिना किसी जांच शिकायत या आरोप के अवर अभियंता का ट्रांसफर प्रशासनिक आधार पर बरेली करवा दिया गया।
तबादले की खुशी अभी अफसर मना ही रहे थे कि अगले दिन एक उच्च अधिकारी के हस्तक्षेप और आशीर्वाद से वह ट्रांसफर रुक गया और अवर अभियंता का स्थानांतरण वापस लखनऊ ही हो गया इससे डिवीजन के भ्रष्ट तंत्र में हड़कंप मच गया।
जब ट्रांसफर रुकने के बाद अवर अभियंता ने अधिशासी अभियंता से बात की तो साहब ने पल्ला झाड़ते हुए कहा कि वह तो चीफ साहब ने किया था लखनऊ में जेई को काम सिखाने के बाद ही चार्ज मिलता है।
क्या सहायक अभियंता सीधे मां के पेट से काम सीखकर आते हैं?
प्रमोशन पाकर आने वाले एई को तुरंत चार्ज मिल जाता है लेकिन जेई को डेढ़-डेढ़ साल तक प्रताड़ित किया जाता है|
इस पूरी घटना ने ऊर्जा विभाग की तबादला नीति जीरो टॉलरेंस की नीति और प्रशासनिक शुचिता पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।
पीड़ित अवर अभियंता और कर्मचारी संगठनों ने साफ कर दिया है कि तानाशाही के खिलाफ यह संघर्ष और कानूनी कार्रवाई अभी थमी नहीं है यह तो बस शुरुआत है।
बिजली विभाग के इस बड़े प्रशासनिक घालमेल पर शासन स्तर से क्या कार्रवाई होती है इस पर सबकी निगाहें टिकी हैं।
ब्यूरो रिपोर्ट
दैनिक सुदर्शन प्रवाह







