लखनऊ–03 अप्रैल
विद्युत विभाग के अमौसी जोन (कृष्णा नगर) के अंतर्गत आने वाले आम्रपाली दुबग्गा और वसंत कुंज उपकेंद्र में विभाग की एकतरफा कार्रवाई के चलते संविदा कर्मचारियों में भारी आक्रोश व्याप्त है।
मामला राजस्व वसूली में बेहतरीन प्रदर्शन के बावजूद कर्मचारियों की ‘फेस आईडी’ (ID 2340) बंद करने और उन्हें प्रताड़ित करने का है।
संसाधनों की कमी या जानबूझकर बनाया गया निशाना?
16 की जगह मात्र 2 कर्मचारी: वर्टिकल व्यवस्था से पूर्व जिन दो उपकेंद्रों पर 16 कर्मचारी राजस्व वसूली का जिम्मा संभालते थे, वर्टिकल लागू होने के बाद वही कार्य केवल 2 संविदाकर्मियों के कंधों पर डाल दिया गया।
संसाधनों का अभाव:
आरोप है कि विभाग द्वारा लगाए जाने वाले कैंपों में न तो कंप्यूटर ऑपरेटर उपलब्ध कराए गए और न ही अन्य जरूरी संसाधन। अधिकारियों के सहयोग की कमी के बावजूद इन 2 कर्मियों ने पूरी निष्ठा से कार्य किया।
शानदार प्रदर्शन पर मिला ‘पुरस्कार’:
रिकॉर्ड के अनुसार, राजस्व वसूली के मामले में ये दोनों सब-स्टेशन जोन में सबसे ऊपर रहे हैं। इसके बावजूद, अधीक्षण अभियन्ता (वाणिज्य) द्वारा OTS योजना (2025-26) और समस्याओं के निस्तारण में ‘खराब प्रदर्शन’ का हवाला देकर नोटिस थमा दिया गया।
बिना समीक्षा के कार्रवाई: कर्मचारियों का कहना है कि 3 दिन के भीतर नोटिस का स्पष्ट जवाब देने के बावजूद, उनके पक्ष पर विचार किए बिना ही उनकी फेस आईडी (ID 2340) बंद कर दी गई, जिससे उनकी रोजी-रोटी पर संकट खड़ा हो गया है।
क्या यह विभाग की तानाशाही है?
एक तरफ विभाग सीमित संसाधनों में बेहतर काम करने का दबाव बनाता है, वहीं दूसरी तरफ जब कर्मचारी रिकॉर्ड तोड़ वसूली करते हैं, तो उन्हें प्रोत्साहित करने के बजाय तकनीकी बाधाएं खड़ी कर काम से रोका जा रहा है।
संविदाकर्मियों का सवाल: जब वसूली में हम सबसे आगे हैं, तो बिना किसी ठोस आधार और जवाब की समीक्षा किए बिना आईडी क्यों बंद की गई?
ब्यूरो रिपोर्ट
दैनिक सुदर्शन प्रवाह








