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अकीदत और ग़म के माहौल में निकला जुलूस-ए-मोहम्मदी हज़ारों नम आँखों ने दी इमाम हुसैन को विदाई|

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जुग्गौर में उमड़ा अकीदतमंदों का सैलाब कर्बला पहुंचकर पेश की खिराज-ए-अकीदत सुरक्षा के रहे कड़े इंतजाम ड्रोन से रखी गई नजर

लखनऊ–26 जून

मोहर्रम के पवित्र और गमगीन अवसर पर राजधानी लखनऊ का जुग्गौर गांव शनिवार को पूरी तरह अकीदत ग़म और धार्मिक श्रद्धा के माहौल में डूब गया यहाँ पारंपरिक रूप से जुलूस-ए-मोहम्मदी निकाला गया जिसमें हज़ारों की संख्या में अकीदतमंदों ने हिस्सा लिया हाथों में अलम थामे और आँखों में आँसू लिए अकीदतमंदों का काफिला कर्बला पहुंचा जहां हज़रत इमाम हुसैन और उनके साथियों की महान शहादत को याद करते हुए उन्हें नम आँखों से खिराज-ए-अकीदत पेश की गई।

पूरे क्षेत्र में माहौल बेहद मातमी रहा जुलूस में शामिल लोगों ने इमाम हुसैन की कुर्बानी को इंसानियत न्याय और सत्य के इतिहास की सबसे बड़ी मिसाल बताया।

पारंपरिक मार्गों से होते हुए जब जुलूस कर्बला पहुंचा तो वहाँ सभी आवश्यक धार्मिक रस्में पूरी शिद्दत के साथ अदा की गईं इस मौके पर अकीदतमंदों ने हज़रत इमाम हुसैन के जीवन और उनके सिद्धांतों को याद किया हज़रत इमाम हुसैन ने अत्याचार और ज़ुल्म के सामने कभी अपना सिर नहीं झुकाया उन्होंने इंसानियत हक़ और सच्चाई की रक्षा के लिए अपने परिवार सहित सर्वोच्च बलिदान दे दिया उनकी यह शहादत आज भी पूरी दुनिया को सत्य न्याय त्याग और आपसी भाईचारे का अमर संदेश देती है।

जुलूस की संवेदनशीलता और सुरक्षा को देखते हुए जिला व पुलिस प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद नजर आया पुलिस विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों की सीधी निगरानी में पूरे मार्ग पर भारी पुलिस बल की तैनाती की गई थी।

सुरक्षा व्यवस्था को चाक-चौबंद रखने के लिए आधुनिक ड्रोन कैमरों से पूरे जुलूस मार्ग की पल-पल की निगरानी की जा रही थी किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए दंगा नियंत्रण बल और विशेष पुलिस टीमों को संवेदनशील स्थानों पर मुस्तैद रखा गया था प्रशासन की इसी सतर्कता और स्थानीय नागरिकों के सूझबूझ भरे सहयोग के चलते पूरा आयोजन अत्यंत शांतिपूर्ण और सौहार्दपूर्ण वातावरण में संपन्न हुआ इस गमगीन और ऐतिहासिक पल के साक्षी बनते हुए जुलूस में मुख्य रूप से राधेश्याम यादव,मो.तौहीद,शारिक मलिक,इस्माइल,मो.शफात, और जुम्मन सहित क्षेत्र के बड़ी संख्या में गणमान्य नागरिक और अकीदतमंद शामिल हुए सभी ने एकजुट होकर इमाम हुसैन की याद में अपनी अकीदत पेश की।

मोहर्रम केवल मातम या शोक मनाने का अवसर नहीं है बल्कि यह हज़रत इमाम हुसैन की उस महान और अद्वितीय कुर्बानी को याद करने का दिन है जिसने सदियों पहले अन्याय और अत्याचार के विरुद्ध संघर्ष की नींव रखी थी यह दिन पूरी इंसानियत को ज़ुल्म के खिलाफ डटने और सच्चाई के रास्ते पर चलने की प्रेरणा देता है।

                                          ब्यूरो रिपोर्ट 

                                   दैनिक सुदर्शन प्रवाह 

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