UDYAM-UP-50-0248277

वेब स्टोरी

ई-पेपर

लॉग इन करें

झोलाछाप डाक्टर ने लगाया  इंजेक्शन मासूम की मौत तीन अन्य को जिला अस्पताल रेफर किया गया एक ही परिवार के हैं सभी पीड़ित अस्पताल को किया गया सीज

trfgcvkj.blkjhgfd

हैदरगढ़/बाराबंकी–28 जून 

हैदरगढ़ कोतवाली क्षेत्र में एक झोलाछाप डॉक्टर की लापरवाही से इलाज के दौरान डेढ़ वर्षीय मासूम की मौत का सनसनीखेज मामला प्रकाश में आया है। परिवादी जनों ने बताया कि गलत इंजेक्शन लगाए जाने के तुरंत बाद बच्चे की तबीयत बिगड़ गई और उसकी मौत हो गई। वहीं, उसी परिवार के तीन अन्य बच्चों की हालत भी गंभीर हो गई, जिन्हें प्राथमिक उपचार के लिये सीएचसी हैदरगढ़ ले जाया गया जहां से सभी को जिला अस्पताल रेफर कर दिया गया है। 

प्राप्त जानकारी के अनुसार, हैदरगढ़ कस्बे के लोहिया वार्ड निवासी कल्लू के चार बच्चों दो वर्षीय हसनैन, दो वर्षीय मारिया, चार वर्षीय साजिद व आठ वर्षीय तमन्ना पिछले लगभग एक सप्ताह से शरीर पर दाने निकलने की समस्या से परेशान थे। इलाज के लिए परिजन उन्हें ठाकुरद्वारा वार्ड स्थित कथित झोलाछाप डॉक्टर जगमोहन गुप्ता के पास लेकर पहुंचे थे।

परिजनों का आरोप है कि डॉक्टर ने बच्चों को इंजेक्शन लगाया। इंजेक्शन लगते ही डेढ़ वर्षीय हसनैन के मुंह से फेना निकलने लगा और वो अचानक बेहोश हो गया जबकि उसकी जुड़वां बहन मारिया को लगातार उल्टियां होने लगीं। इसके बाद अन्य दोनों बच्चों की तबीयत भी तेजी से बिगड़ने लगी।

चारों बच्चों की हालत बिगड़ती देख परिजन तत्काल उन्हें सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र हैदरगढ़ लेकर पहुंचे। वहां मौजूद चिकित्सकों ने जांच के बाद हसनैन को मृत घोषित कर दिया, जबकि मारिया, तमन्ना और साजिद की हालत गंभीर देखते हुए उन्हें बेहतर इलाज के लिए जिला अस्पताल रेफर कर दिया।

मासूम की मौत के बाद परिजनों में कोहराम मच गया। उन्होंने कथित झोलाछाप डॉक्टर पर गंभीर लापरवाही का आरोप लगाते हुए कहा कि गलत इंजेक्शन लगाए जाने के कारण ही बच्चों की हालत बिगड़ी और हसनैन की मौत हुई। परिजनों ने दोषी डॉक्टर के खिलाफ कठोर कानूनी कार्यवाही की मांग की है।

घटना की सूचना मिलते ही इलाके में हड़कंप मच गया और मौके पर स्थानीय लोगों की भीड़ जमा हो गई। इसके बाद प्रशासन और स्वास्थ्य महकमे की नींद टूटी और अधिकारियों ने मौके पर पहुंच कर मामले की जांच शुरू कर दी। अधिकारियों का कहना है कि प्रारंभिक जांच में पाया गया कि निजी मकान में ही अवैध तरीके से अस्पताल का संचालन किया जा रहा था। आरोपी डॉक्टर द्वारा डिग्री व आवश्यक दस्तावेज नहीं प्रस्तुत करने के चलते अस्पताल को सील कर दिया गया है और आरोपी डॉक्टर के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की तैयारी चल रही है।

अधिकारियों के अनुसार परिजनों की शिकायत के आधार पर सभी पहलुओं की जांच की जा रही है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट और चिकित्सकीय जांच के आधार पर आगे की विधिक कार्यवाही की जाएगी।

यदि जांच में चिकित्सकीय लापरवाही या अवैध रूप से इलाज करने के तथ्य सामने आते हैं, तो संबंधित डॉक्टर के खिलाफ सख्त कार्यवाही की जाएगी।

इस घटना ने एक बार फिर बाराबंकी जिले में धड़ल्ले से संचालित हो रहे झोलाछाप डॉक्टरों और अवैध क्लीनिकों पर सवाल खड़े कर दिए हैं। हाल के दिनों में जिले में कई ऐसे मामले सामने आ चुके हैं, जिनमें कथित डॉक्टरों के इलाज के दौरान मरीजों की मौत या तबीयत बिगड़ने की शिकायतें सामने आई हैं। इसके बावजूद स्वास्थ्य विभाग की कार्रवाई पर लगातार सवाल उठ रहे हैं।

मामले को लेकर जब एसीएमओ बाराबंकी लव कुमार गुप्ता से सवाल किया गया तो उन्होंने बताया कि खसरा से चारों बच्चे पीड़ित थे जिनका प्राइवेट इलाज चल रहा था, हसनैन को मृत स्थिति में अस्पताल लाया गया जिसके बाद बाकी बच्चों की गंभीर स्थिति देखते हुये उन्हें तत्काल जिला अस्पताल रेफर कर दिया गया है। और अवैध अस्पताल को सील कर दिया गया है। वहीं कोतवाली प्रभारी अनिल कुमार पांडेय ने बताया कि आरोपी डाक्टर को हिरासत में लेकर एफआईआर करने की कार्यवाही पुलिस द्वारा की जा रही है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद जरूरी कार्यवाही की जायेगी।

                                              ब्यूरो चीफ़ 

                                           शिवम् अवस्थी 

trfgcvkj.blkjhgfd

Leave a Comment

और पढ़ें
और पढ़ें