लखनऊ–29 जून
राजधानी के गोमतीनगर जोन अंतर्गत लौलाई विद्युत उपकेंद्र पर बीते शुक्रवार (26 जून) की रात कानून-व्यवस्था और सरकारी संपत्ति की सुरक्षा के दावों की सरेआम धज्जियां उड़ गईं बिजली सप्लाई बाधित होने से नाराज काशीराम आवास के सैकड़ों निवासियों ने उपकेंद्र पर अचानक धावा बोल दिया।
उग्र भीड़ ने वहां तैनात कर्मचारियों के साथ न केवल बर्बरतापूर्वक मारपीट की बल्कि परिसर में खड़ी उनकी निजी गाड़ियों और कार्यालय के उपकरणों को भी मलबे में तब्दील कर दिया था सबसे शर्मनाक बात यह रही कि यह पूरी वारदात को मौके पर मौजूद पुलिस बल की मूक मौजूदगी में अंजाम दिया गया था|
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार हाल ही में बिजली विभाग द्वारा वर्टिकल व्यवस्था लागू कर आउटसोर्स कर्मचारियों की बड़े पैमाने पर छंटनी की गई है इसके कारण उपकेंद्रों पर स्टाफ बेहद सीमित रह गया है।
शुक्रवार की रात जब बिजली कटी तो महज मुट्ठी भर कर्मचारियों के लिए तुरंत फॉल्ट ठीक करना मुमकिन नहीं था इसी बात से आक्रोशित होकर काशीराम आवास के निवासियों ने उपकेंद्र को घेर लिया और हिंसक हो गए थे घटना के बाद सामने आई तस्वीरों और वीडियो में तबाही का मंजर साफ देखा जा सकता है।
कर्मचारियों की मोटरसाइकिलें जमीन पर टूटी-बिखरी पड़ी हैं दफ्तर के शीशे चकनाचूर हैं और चारों तरफ ईंट-पत्थर बिखरे हैं उग्र भीड़ के खौफ से बिजली कर्मियों ने किसी तरह भागकर अपनी जान बचाई थी|
इस खौफनाक वारदात को बीते 48 घंटे से अधिक का समय हो चुका है लेकिन बिजली विभाग के किसी भी आला अधिकारी ने न तो घटनास्थल का दौरा किया और न ही पीड़ित कर्मचारियों का हाल जाना।
उपखंड अधिकारी और अवर अभियंता द्वारा लिखित तहरीर दिए जाने के बावजूद पुलिस ने शुरुआत में मामला दबाए रखा।
भारी दबाव के बाद चिनहट पुलिस ने आखिरकार अभियोग तो पंजीकृत कर लिया है लेकिन वारदात के इतने घंटे बाद भी एक भी उपद्रवी की गिरफ्तारी नहीं हो सकी है।
गाड़ियां टूट जाने के कारण जहां कर्मचारियों को ड्यूटी पर आने-जाने में भारी असुविधा हो रही है वहीं दफ्तर के भीतर भी वे खुद को असुरक्षित महसूस कर रहे हैं।
इस घटना से नाराज विद्युत कर्मचारी संगठनों ने पुलिस और प्रशासन को सीधे शब्दों में चेतावनी दी है।
संगठनों का कहना है कि यदि जल्द ही उपद्रवियों को चिन्हित कर जेल नहीं भेजा गया और उपकेंद्रों पर सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम नहीं किए गए तो वे सामूहिक कार्य बहिष्कार करने को मजबूर होंगे।
अब देखना यह है कि राजधानी में सरकारी सेवकों को दौड़ा-दौड़ाकर पीटने वाले इन रसूखदार उपद्रवियों पर चिनहट पुलिस शिकंजा कसती है या फिर कर्मचारी संगठन सड़क पर उतरने को मजबूर होंगे।
ब्यूरो रिपोर्ट
दैनिक सुदर्शन प्रवाह







