लखनऊ–29 मई
राजधानी के 400 KV उपकेंद्र जेहटा से एक बड़ी और चौंकाने वाली खबर सामने आ रही है। महीनों की खींचतान और जांच के बाद अंततः 500 MVA के विशालकाय ट्रांसफार्मर को ‘डैमेज’ घोषित कर दिया गया है। यह घटना बिजली विभाग के उन दावों की पोल खोलती है जिसमें ‘स्मार्ट ग्रिड’ और ‘आधुनिक प्रोटेक्शन सिस्टम’ की बातें की जाती है|
सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब इस उपकेंद्र और ट्रांसफार्मर की सुरक्षा के लिए करोड़ों रुपये खर्च कर अत्याधुनिक प्रोटेक्शन सिस्टम लगाए गए थे, तो वे ऐन वक्त पर काम क्यों नहीं आए जानकारों का मानना है कि यदि लाइन समय रहते ट्रिप हो जाती तो ट्रांसफार्मर की वाइंडिंग जलने से बच सकती थी।
500 MVA के ट्रांसफार्मर की वाइंडिंग का फूँक जाना यह साबित करता है कि सुरक्षा घेरा पूरी तरह निष्क्रिय था।
अफसरों की ‘घोर लापरवाही’ और शक्ति भवन की चुप्पी इतने बड़े नुकसान के बावजूद विभाग में सन्नाटा पसरा है।
नियमतः 500 MVA ट्रांसफार्मर की देखरेख और सुरक्षा की सीधी जिम्मेदारी अधिशासी अभियंता की होती है। लेकिन हैरानी की बात है कि यूपीपीसीएल चेयरमैन की ओर से अब तक कोई बड़ी कार्रवाई या ‘हंटर’ नहीं चला है।
माननीय ऊर्जा मंत्री जी ने स्पष्ट चेतावनी दी थी कि ट्रांसफार्मर फूँका तो अधिकारी को फूँक देंगे लेकिन जेहटा मामले में अब तक किसी भी जिम्मेदार पर गाज नहीं गिरी है।
चूंकि ट्रांसफार्मर अभी वारंटी पीरियड में है इसलिए निर्माण करने वाली कंपनी इसे ठीक तो कर देगी, लेकिन सवाल उस ‘सिस्टम’ का है जिसने राजधानी की बिजली आपूर्ति को जोखिम में डाल दिया।
क्या करोड़ों के प्रोटेक्शन सिस्टम की खरीद में गुणवत्ता से समझौता किया गया था?
क्या अधिशासी अभियंता और संबंधित टीम ने रूटीन मेंटेनेंस और टेस्टिंग में लापरवाही बरती?
क्या शासन स्तर पर बड़े अधिकारियों को बचाने की कोशिश की जा रही है?
500 MVA के ट्रांसफार्मर का जलना विभाग के माथे पर कलंक की तरह है। अब देखना यह है कि ऊर्जा मंत्री के सख्त आदेशों का अनुपालन होता है या यह मामला भी फाइलों में दबकर रह जाएगा।
ब्यूरो रिपोर्ट
दैनिक सुदर्शन प्रवाह








