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भ्रष्टाचार का पीला खेल ग्राम पंचायत बागवानी में विकास के नाम पर लूट

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श्रावस्ती–29 मई 

प्रदेश सरकार भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस की नीति का दावा करती है लेकिन जनपद श्रावस्ती के विकासखंड अंतर्गत ग्राम पंचायत बागवानी से जो तस्वीर और खबरें आ रही हैं वे इन दावों की पोल खोलती नजर आ रही हैं यहाँ विकास कार्य नहीं बल्कि सरकारी धन की खुली बंदरबांट का खेल चल रहा है|

ग्रामीणों का आरोप है कि ग्राम पंचायत में जो खड़ंजा लगवाया जा रहा है उसमें मानकों की धज्जियां उड़ा दी गई हैं निर्माण कार्य में दोयम दर्जे की सूखी और कच्ची ईंटों का प्रयोग किया जा रहा है।

ग्रामीणों का कहना है कि यह सड़क जनता की सुविधा के लिए नहीं बल्कि प्रधान प्रतिनिधि के अपनी जेब भरने के लिए बनाई जा रही है।

एक तरफ सरकार नारी शक्ति को सशक्त करने के लिए पंचायत चुनाव में महिलाओं को आरक्षण दे रही है वहीं बागवानी में स्थिति इसके उलट है।

श्रीमती नीलम तिवारी केवल कागजी प्रधान बनकर रह गई हैं सत्ता की पूरी कमान उनके पति श्री रामरुप तिवारी के हाथों में है।

ग्रामीणों का सीधा आरोप है कि प्रधान पति ही ग्राम पंचायत की योजनाओं को अपनी मर्जी से चला रहे हैं और भ्रष्टाचार को अंजाम दे रहे हैं।

ग्राम पंचायत की योजनाओं का लाभ आम जनता तक पहुँचने के बजाय भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ रहा है।

घटिया निर्माण सामग्री का प्रयोग करके सरकारी बजट का एक बड़ा हिस्सा डकारा जा रहा है।

ग्रामीणों में इस बात को लेकर भारी आक्रोश है कि उनके हक के पैसे से प्रधान पति अपना रसूख बढ़ा रहे हैं।

इस मामले के उजागर होने के बाद अब गेंद जिले के आला अधिकारियों के पाले में है।

क्या जिलाधिकारी और मुख्य विकास अधिकारी इस मामले का संज्ञान लेंगे?

क्या निर्माण कार्य की गुणवत्ता की जांच के लिए कोई तकनीकी टीम भेजी जाएगी?

क्या प्रधान पति के हस्तक्षेप पर रोक लगाकर उचित कानूनी कार्यवाही की जाएगी?

देखना यह है कि क्या प्रशासन इन भ्रष्टाचार के दोषियों पर नकेल कसता है या फिर बागवानी की जनता इसी तरह घटिया विकास कार्य झेलने को मजबूर रहेगी।

                                            ब्यूरो रिपोर्ट 

                                      दैनिक सुदर्शन प्रवाह 

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